Monday, January 26, 2026
spot_img
13 C
Lucknow
Monday, January 26, 2026
spot_img
Homeप्रदेशअ•भ•सा•प द•ई• की समग्र साहित्य संगोष्ठी संपन्न ।

अ•भ•सा•प द•ई• की समग्र साहित्य संगोष्ठी संपन्न ।

लखनऊ 25 जनवरी अखिल भारतीय साहित्य परिषद की दक्षिण इकाई द्वारा स्थानीय के के वी कालेज के सभागार मे संगोष्ठी का आयोजन किया गया । संघ साहित्य समग्र चिन्तन प्रवाह विषय आधारित संगोष्ठी मे अभिनंदन समारोह एवं संगोष्ठी मे विषय संघ साहित्य समग्र चिंतन प्रवाह पर विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया ।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद दक्षिण इकाई अध्यक्ष प्रो डॉ नीतू शर्मा ने अतिथियों का स्वागत-सत्कार करके मंच से संगीता पाल को सरस्वती वंदन के लिए आमंत्रित किया । परम्परागत तरीके से राजीव वत्सल द्वारा परिषद गीत प्रस्तुत किया गया। डॉ बलजीत श्रीवास्तव ने संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए अपने वक्तव्य में संघ के सौ वर्ष पूर्ण करने पर हर्ष जताया तथा संघ साहित्य पर रचित १५०० पुस्तकों की समृद्धिशाली श्रृखला की जानकारी दर्शको और शोधार्थीयो से साझा की।

विशिष्ठ अतिथि डाॅ. मधुलिका ने वक्तव्य देते हुए कहा वर्तमान मे अधिकांश परिवार पाश्चात्य संस्कृति के चकाचौंध में पड़कर भारतीय संस्कृति का त्याग करते जा रहे हैं। जो चिंता का विषय है। राष्ट्र के पुनर्निर्माण पर बल देते हुए प्रकृति और विज्ञान को जोड़ने की बात कही।


विशिष्ट अतिथी अवध प्रान्त अध्यक्ष विजय त्रिपाठी ने संघ के इतिहास की बात करते हुए तत्कालीन संघ संचालक के श्रम और त्याग के साथ संघ के परम्परागत गीतों की विस्तृत चर्चा से शोध करने मे लगे विद्यार्थियो को संघ का महत्व बताया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ . सुशील चंद्र त्रिवेदी और मुख्य अतिथि डॉ पवन पुत्र बादल जी का अभिनंदन प्रतीक चिह्न,अंग वस्त्रो से किया गये । अध्यक्षीय उद्बोधन मे डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी जी ने कार्यक्रम में अपना वक्तव्य रखते हुए संघ की परम्परागत संस्कृतनिष्ठ शिक्षा के बारे मे बताया।


ईकाई संरक्षक एवम विशिष्ट वक्ता प्रो. हरिशंकर मिश्र ने राष्ट्र के सुदृढ़ होने और राष्ट्र के विकास के मार्ग को सुदृढ़ करने की प्रेरणा दी, अहम राष्ट्र के सूक्ति को विस्तृत रूप से चर्चा की उन्होंने कहा हम राष्ट्र के हैं और राष्ट्र हमारा है, मिश्र जी ने कलिः शयानो भवति उत्तिष्ठंस्त्रेता भवति कृतं संपद्यते चरन् सूक्ति द्वारा चारों युग के बारे में बताने के बाद सनातन मे मूर्ति पूजा के लिए पत्थर से नरसिंह के प्रगट होने की घटना पर गोस्वामी तुलसीदास के वचनो के सत्य कहते हुए अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा॥
मोरें मत बड़ नामु दुहू तें। किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें॥ श्लोक के द्वारा मूर्ति पूजा का कारण स्पष्ट किया।


राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवन पुत्र बादल जी ने भारतीय परंपरा और पाश्चात्य की तुलना करते हुए इसके मूल तत्व दर्शको का पर आकर्षित किया , संघ के इतिहास की चर्चा करते हुए संघ साहित्य की तत्वामसि पुस्तक पढने की बात की।


कार्यक्रम मे महानगर ईकाई के अध्यक्ष निर्भय गुप्ता, ममता पंकज, ,लोक संस्कृत शोध संस्थान के डाॅ एस के द्विवेदी, डाॅ धीरेन्द्र कौशल, डॉ सुरसरी तरंग मिश्र, ज्योति किरन रतन मिडिया प्रभारी फोटोग्राफर्स क्लब ,प्रो प्रणव मिश्र, डा कुमुद पाण्डे, सहित तमाम गणमान्य अतिथिगण एवम शोधार्थी छात्र -छात्राओ की उपस्थित हुए

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine
- Advertisment -
Google search engine
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img

LATEST POST

POPULAR POST

error: Content is protected !!