लखनऊ 20 फरवरी मंजूश्री संस्था के द्वारा स्थानीय संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह मे “पुर्जा पुर्जा कट मरे”नाटक का मंचन के साथ कला ,साहित्य, संस्कृति मीडिया मे विशिष्ट योगदान करने वाली विभूतियो को मंजूश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि- डॉ दिलीप कुमार अग्निहोत्री, राज्य सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश, के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के बाद ॠतु सुहास आई ए एस अपर निदेशक स्थानीय निदेशालय, विभा सिंह उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी , डाॅ अमिता दुबे मुख्य संपादक उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, डाॅ परवीन आज़ाद पुलिस उपाधीक्षक लखनऊ उत्तर प्रदेश, ज्योति किरन रतन, बहुमुखी प्रतिभा एवं मीडिया पर्सन लखनऊ को मंजूश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक नलिनी श्रीवास्तव एवं मिडिया प्रभारी विवेक शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया की गुरू गोविन्द सिंह जी की लिखी प्रसिद्ध और ऊर्जावान उक्ति ‘पूर्जा पूर्जा कट मरे’, पर आधारित नाटक को शैलेश श्रीवास्तव की परिकल्पना और निर्देशन मे तैयार किया गया है । पटकथा मे एक बहादुर व्यक्ति को, भले ही उसके शरीर के टुकड़े हो जाए, अपने लक्ष्य विशेषतया राष्ट्र पर बलिदान होने के लिए प्रेरित करती है। गुरू गोविन्द सिंह जी की ये उक्ति उनके परिवार के बलिदान की महत्तवता को, गा गा कर सिख समुदाय द्वारा स्मरण भी की जाती है। जिसमें गरीबों की सेवा, देश प्रेम, समर्पण को इंगित किया गया है। मुख्य अतिथि ने कहा की आज के सम्मान समारोह मे मातृ शक्तियो को उनके मिले अवसरो ने समाज को नयी दिशा देती है नाटक की कथा भावी पीढी मे देश भक्ति भाव को जागृत रखेगा।
नाटक को मंच पर प्रस्तुत करने के लिए करूणा शंकर उपाध्याय ने हममुददीन , सैयद आलेख मेंहदी ने कुॅवर रणविजय सिंह, आशुतोष पांडेय ने राणा केसरी , अदिती तिवारी ने तारिणी, अंशुमाला ने राजमाता ,अनिल कुमार ने राजगुरू, पूनम यादव ने महारानी के किरदार मे विशिष्ट प्रभाव छोडा।
नाटक मे हिन्दी साहित्य के छायावाद युग के आधारस्तम्भ महान कवि जयशंकर प्रसाद जी, व पद्मविभूषण कविवर गोपाल दास नीरज की कविताओं के अंशो को संकलित किया गया । देशभक्ति भाव से ओतप्रोत अनाम वीरांगनाओ और शहीदो को कहानी का आधार बनाया गया है। आजादी के लिए सैकडो लोगो ने राष्ट्र के लिए बलिदान दिया है । जिनका बलिदान भावी पीढी के लिए प्रेरणा को का कार्य करेगा इस भाव को प्रमुखता से शामिल किया गया है। नाटक में जन सामान्य की वीरता, समर्पण, त्याग, बलिदान दिखता है। वर्तमान समय मे लोगो की पसंद को देखते हुए नाटक मे आधुनिक तकनीक का भी भरपूर उपयोग किया गया है।अभिषेक खरवार के ध्वनि प्रभाव, संग अजीत श्रीवास्तव, पूजा के गायन, ने मंचन को संगीतमय बनाया । विकास दुबे की प्रकाश प्रभाव और संजय श्रीवास्तव अनिल कुमार की मंच व्यवस्था तत्कालीन समय को दिखाने मे सफल हुए। आयुष श्रीवास्तव के नृत्य निर्देशन ने कवियो की रचनाओ को सजीव किया।कीर्तिका श्रीवास्तव, सृष्टि श्रीवास्तव, शेख मोहम्मद, अरसलान, खुशी रस्तोगी, दिव्या नेगी, जसलीन, प्रियांशु, श्रृषभ पांडेय, गौरव अग्रवाल, अजीत दास शैलेन्द्र कुमार, अरविंद कुमार, कौशलेन्द्र श्रीवास्तव, अदिती तिलवारी ,उपेन्द्र सोनी के सहयोग से सजी नाट्य प्रस्तुतीकरण को दर्शको की भरपूर तालियां मिली।
कार्यक्रम मे लगातार जिन कवि जयशंकर प्रसाद और पद्मविभूषण कविवर गोपाल दास नीरज की रचनाओ से नाटक का प्रस्तुतीकरण प्रभावशाली बना उन्हे सभी कलाकारो के द्वारा नमन किया गया।








