मुंबई की शिक्षिका रूबल नागी को प्रतिष्ठित ग्लोबल टीचर प्राइज से सम्मानित किया गया और 1 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि दी गई। उन्होंने झुग्गी बस्तियों की दीवारों पर अक्षर, गिनती, गणित और सामान्य ज्ञान के शैक्षिक चित्र बनाकर उन्हें ओपन-एयर क्लासरूम में बदल दिया, ताकि स्कूल नहीं जा पाने वाले बच्चे अपने मोहल्ले में ही पढ़ सकें। इस पहल से 800 से अधिक खुले कक्षा स्थल बने और हजारों बच्चे शिक्षा से जुड़े, साथ ही स्कूल छोड़ने की दर में 50 प्रतिशत से अधिक कमी आई।








