सुलतानपुर स्पेशल जज पाक्सो एक्ट नीरज श्रीवास्तव की अदालत ने बुधवार को पांच वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के करीब 20 माह पुराने मामले में एक दिन पूर्व दोषी ठहराए गए बुजुर्ग वीरेंद्र चौहान की सजा पर अपना फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में बुजुर्ग वीरेंद्र चौहान को 20 साल के कठोर कारावास व 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी को सजा काटने के लिए जेल भेजने का आदेश दिया है।
कोतवाली देहात थाने के एक गांव की रहने वाली पांच वर्षीय पीड़िता की माँ ने 20 जून साल 2024 की घटना बताते हुए स्थानीय कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। वादिनी के आरोप के मुताबिक उनके यहां मकान निर्माण का कार्य चल रहा था,इसी दौरान वादिनी ने अपने यहां काम कर रहे मजदूर वीरेंद्र चौहान को पानी का मोटर चलाने के लिए कहा। वादिनी के मुताबिक आरोपी मजदूर मोटर चलाने के लिए गया और मौका पाकर उनकी मासूम पुत्री के साथ दुष्कर्म किया। मामले का ट्रायल स्पेशल जज पाक्सो एक्ट की अदालत में चला। इस दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने मजदूर होने की वजह से गलत तरीके से फंसाने का तर्क पेश किया था। वहीं विशेष लोक अभियोजक रमेश चन्द्र सिंह ने वीरेंद्र चौहान को ही घटना का जिम्मेदार ठहराया था। अदालत ने उभय पक्षो को सुनने के पश्चात आरोपी को दोषी मानते हुए गत 24 फरवरी को उसे जेल भेजने का आदेश दिया था। बुधवार के लिए अदालत ने दोषी की सजा पर सुनवाई का दिन तय किया था। अदालत ने दोषी को जेल से तलब कर अपना फैसला सुनाया और उसे फिर जेल भेजने का आदेश दिया है।








