हाईकोर्ट ने डी जी पी को दिया आदेश झूठी एफआईआर दर्ज कराने वाले पर हो केस गवाह भी नहीं जायेंगे बक्से”हाईकोर्ट का फैसला वकई में सराहनीय है इस फैसले से फर्जी केसों पर अंकुश लगेगा साथ ही कई जिंदगियां तबाह होने से बच भी जायेंगी।जिस तरीके से कोई भी शिकायत कर्ता फर्ज़ी शिकायत लेकर थाने चौकी पर पहुंच कर आसानी से किसी व्यक्ति पर आरोप लगा कर मुकदमा पंजीकृत करा कर उसे जेल भेजवा देता था बाद में पता चलता था कि वो निर्दोष था।तमाम ऐसे मामलों में पाया गया कि वो निर्दोष था फिर भी उस पर छेड़छाड़, अवैध वसूली, रंगदारी, जैसे गंभीर मामलों में साजिश के तहत फसा दिया गया पुलिस झूठी मनगढ़ंत कहानी बना कर न्यलय में प्रस्तुत कर दिया और वो सजा काटने के लिए जेल चला गया।बाद में पता चला कि वो तो बिल्कुल निर्दोष था बदले के भावना से एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया था।और न झूठी एफआईआर लिखाने वालों पर कोई कार्यवाही होती थी और न झूठी रिपोर्ट लगाने वाले विवेचना कर रहे विवेचक पर।लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।यदी पाया जाता है कि एफआईआर झूठी थी तो एफआईआर लिखाने वाले पर केस तो होगा ही साथ गवाह भी नहीं बच पायेंगे अदालत में विवेचक को भी तलब किया जा सकता है।इस लिए अब एफआईआर दर्ज करने से पहले पुलिस ठोस सबूत इकट्ठा करेगी जांच पड़ताल करने में आरोपी के खिलाफ यदि डराने, धमकाने का आडियो वीडियो जैसे ठोस सबूत पाती है तभी रंगदारी मांगने का अवैध वसूली करने का छेड़छाड़ एस सी एस टी जैसे गंभीर मामलों का मुकदमा पंजीकृत कर सकती हैं।ऐसा नही होगा कि दो गवाह लेकर पहुंचे और एस सी एस टी छेड़छाड़ का मुकदमा पंजीकृत करवा दिए।किसी के मोबाइल नंबर पर या स्कैनर पर साजिश के तहत कुछ रूपये भेज कर थाने चले गए और रंगदारी अवैध वसूली का मुकदमा दर्ज करा दिए।अब जांच में पूंछा जायेगा कि आपको कब और कहां कैसे डरा धमकाकर पैसे लिए गये, आपने पैसे क्यों दिये आपका कोई अवैध कारोबार तो नहीं।जब आपको डराया धमकाया गया तो उस समय आप पुलिस के पास क्यों नहीं गये।जिससे अब निर्दोष व्यक्ति को आसानी से दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।









