लखनऊ 29 अप्रैल 2026 लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और शिक्षा के बाज़ारीकरण के खिलाफ प्रस्तावित छात्र प्रदर्शन को शुरू होने से पहले ही रोक दिया गया। छात्र संगठनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देश पर पुलिस ने बिना किसी उकसावे के छात्रों को हिरासत में ले लिया।जानकारी के अनुसार, आइसा, एनएसयूआई और एससीएस से जुड़े छात्र 29 अप्रैल को गेट नंबर 1 पर शांतिपूर्ण धरने के लिए एकत्र हो रहे थे। इसी दौरान प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी के निर्देश पर पुलिस बल बुलाया गया और कई छात्रों को मौके से हिरासत में ले लिया गया।छात्र संगठनों ने इसे “पूर्व-नियोजित दमनात्मक कार्रवाई” बताया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में लगातार विरोध की आवाज़ों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि जहां एक ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं कुछ संगठनों से जुड़े हिंसक तत्वों को संरक्षण दिया जाता है।मामले को शिक्षा के निजीकरण से भी जोड़ते हुए छात्रों ने कहा कि हाल ही में कई कोर्सों में 40% से 200% तक फीस बढ़ाई गई है और स्व-वित्तपोषित सीटों का विस्तार किया गया है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बढ़ते निजीकरण का हिस्सा बताया जा रहा है।छात्र नेताओं ने प्रशासन पर संवाद से बचने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब फीस वृद्धि को लेकर कुलपति से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने मुलाकात से परहेज किया।छात्र संगठनों का कहना है कि फीस वृद्धि का सबसे अधिक असर दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, महिला और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों पर पड़ेगा, जिससे उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच और सीमित हो जाएगी।छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि फीस वृद्धि वापस नहीं ली गई और इस तरह की कार्रवाई जारी रही, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। उनका कहना है कि यह सिर्फ फीस का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक माहौल को बचाने की लड़ाई है।
फीस वृद्धि के विरोध से पहले ही छात्रों को हिरासत में लिया गया लखनऊ विश्वविद्यालय में बवाल
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Apr 29, 2026
