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पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का ऑन स्पॉट एक्शनसीएम की जीरो पेण्डेंसी नीति के तहत स्थायी रूप से सुलटाये 87 फीसदी मामले न्याय की अभूतपूर्व रफ्तार, सुलझाये छात्रवृत्ति व जाति अनुसूची के जटिल पेंच डेढ़ वर्ष में 2962 पीड़ितों को मिली राहत धरातल पर उतरी सरकार की मंशा -राजेश वर्मा।


लखनऊ
प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में अक्सर फाइलें पटल दर पटल घूमती रहती हैं। पीड़ित पसीना बहाते रहते हैं और उनके मामलों का स्थायी निदान नहीं हो पाता है। उप्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष पूर्व सांसद राजेश वर्मा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व व निर्देशन में ऑन स्पाट एक्शन ले कर जीरो पेण्डेंसी नीति के तहत कार्य करते हुए इस उक्ति को असत्य ठहराने का कार्य किया है। गत डेढ़ वर्ष में पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा, उपाध्यक्ष सोहनलाल श्रीमाली व उपाध्यक्ष सूर्यप्रकाश पाल समेत सभी सदस्यों की सक्रिय कार्यशैली ने पीड़ितों को बड़ी राहत देते हुए आयोग में लम्बित 87 प्रतिशत प्रकरणों का स्थायी समाधान कर प्रदेश सरकार की मंशा को असल जमीन पर उतारने का कार्य कर दिखाया है। आयोग की इस अभूतपूर्व पहल से ऐतिहासिक रूप से 3394 में से 2962 पीड़ितों को तय समय में न केवल न्याय मिला है बल्कि न्याय के प्रति उनकी आस्था पहले की अपेक्षा कहीं अधिक दृढ़ हुई है। आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने बताया कि बीते सितंबर 2024 से अप्रैल 2026 के मध्य की इस स्पीड ने एक नवीन कीर्तिमान स्थापित किया है। साथ ही पीड़ित वर्ग में सरकार, आयोग व व्यवस्था के प्रति अटूट भरोसा जगाया है। उन्होंने बताया कि आयोग ने प्रदेश के युवाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों को अपनी प्राथमिकता में रखा है और छात्रवृत्ति तथा शैक्षणिक सुविधाओं को ले कर दफ्तरों के चक्कर काटने वाले पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए एक सुरक्षा कवच बन कर सामने आया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा और करियर से जुड़े मामलों को टॉप प्रायोरिटी पर रखते हुए तत्काल उन्हें सुलझाने की मुहिम छेंड़ी गई है जिससे किसी भी होनहार का भविष्य प्रशासनिक लापरवाही की भेंट न चढ़ सके। श्री वर्मा ने बताया कि तकनीकी बाधाओं के कारण जिन छात्रों की छात्रवृत्तियां किसी कारणवश रूकी थीं, आयोग ने व्यक्तिगत रूचि ले कर उन्हें तत्काल जारी कराया जिससे हजारों युवाओं की पढ़ाई का रास्ता साफ हुआ। आयोग के अध्यक्ष पूर्व सांसद श्री वर्मा ने बताया कि आयोग ने जाति अनुसूची का जटिल पेंच सुलझा कर नीतिगत मोर्चे पर बड़ी जीत हासिल की है। यूपी की राजनीति और सामाजिक ताने बाने में अन्य पिछड़े वर्गों की अनुसूची-एक में जातियों को शामिल करने या हटाने का मुद्दा हमेशा से ही बेहद संवेदनशील और पेचीदा रहा है। तकनीकी और सामाजिक बारीकियों के कारण ऐसे प्रकरण वर्षों वर्ष ठंडे बस्ते में पड़े रहते थे। श्री वर्मा के अनुसार आयोग के पास इस श्रेणी से जुड़े कुल 324 जटिल प्रत्यावेदन आए थे। इनके निस्तारण में आयोग ने असाधारण तेजी दिखाते हुए इनमें से रिकॉर्ड 307 मामलों का अंतिम निस्तारण कर बड़ी कामयाबी दर्ज की है जो कि सामाजिक समरसता की दिशा में भी एक बडा़ कदम है। उन्होंने कहा कि आज आयोग का काम सिर्फ दफ्तरों में बैठ कर शिकायतें बटोरना या फाइलों का वजन बढ़ाना नहीं बल्कि हर पीड़ित को धरातल पर वास्तविक और त्वरित राहत पहुंचाना भी है। आयोग की कार्यपद्धति की यह गति भविष्य में भी इसी स्पीड से बरकरार रहेगी।

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By admin

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