पारा थाना क्षेत्र का मामला, पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार।
राजधानी लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की (मुस्कान) काल्पनिक नाम जिसकी उम्र 17 वर्ष है उससे कथित छेड़छाड़ और परिवार को धमकाने का मामला सामने आया है, पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत करने के बाद भी आरोपी पक्ष की ओर से मामले में समझौता करने का दबाव बनाया गया। परिवार का कहना है कि पहले भी विवाद के बाद दोनों पक्षों में समझौता कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से दोबारा छेड़छाड़ और धमकी की घटनाएं सामने आईं।
मामले को लेकर पीड़ित पक्ष की ओर से उसकी मां परवीन बानो व भाई द्वारा अधिकारियों को दिए गए प्रार्थना पत्रों में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, दस्तावेजों के मुताबिक, पीड़ित परिवार कांशीराम कॉलोनी, सदरौना, सरोजनीनगर क्षेत्र का निवासी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों में जिनका नाम (शमशुद्दीन,और उसका पुत्र कल्लू) द्वारा नाबालिग लड़की और उसके परिवार को परेशान किया जाता है।
पीड़ित पक्ष की शिकायत के अनुसार, आरोपी पक्ष के लोगों द्वारा घर के बाहर खड़े होकर गाली-गलौज की जाती है तथा जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि नाबालिग लड़की के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं।
परिवार का आरोप है कि घटना के बाद जब पुलिस से शिकायत की गई तो आरोपी पक्ष की ओर से समझौता करने का दबाव बनाया जाता है, जिसके चलते शिकायतकर्ता के अनुसार, पूर्व में भी संबंधित पुलिस चौकी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौता कराया गया था।
IGRS में भी पहुंचा मामला
मामले की शिकायत जनसुनवाई प्रणाली (IGRS) के माध्यम से भी की गई। उपलब्ध दस्तावेज में शिकायत को महिला हेल्पलाइन-181 श्रेणी में दर्ज किए जाने का उल्लेख है शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
बाद की शिकायत में परिवार ने आरोप लगाया है कि 30 सितंबर 2025 को दोबारा छेड़छाड़ और अभद्रता की घटना हुई तथा पूर्व में हुए समझौते के बावजूद विवाद फिर सामने आया। शिकायत में मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत में नाबालिग से छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो क्या मामले में विधि के अनुसार प्रभावी जांच और कार्रवाई हुई? क्या पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बनाया गया? और यदि पहले समझौता हुआ था, तो उसके बाद कथित रूप से दोबारा घटना कैसे हुई?
नाबालिग से जुड़े मामलों में समझौते के दबाव के बजाय उसकी सुरक्षा, स्वतंत्र बयान और कानून के अनुसार जांच को प्राथमिकता दिया जाना आवश्यक है।
पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, नाबालिग और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।
