दर्शकों को जज्बात में डुबो गयी साहिर-अमृता की अनकही दास्तांदर्शकों को जज्बात में डुबो गयी साहिर-अमृता की अनकही दास्तां

लखनऊ 1 मई मोहब्बत वह शय है जिसमें हारकर भी शख्स जीत और जीतकर भी हार जाता है। एमबी क्लब छावनी में आज मंचित नाटक ‘वो अफ़साना’ भारतीय साहित्य की दो प्रतिष्ठित हस्तियों साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम को गीतों भरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे गया। हुनर क्रिएशन एंड क्राफ्ट एसोसिएशन की ओर से दिल्ली की राबता संस्था के कलाकारों ने शमीर के निर्देशन में किया।

मुख्य अतिथि के तौर पर चीफ आफ स्टाफ मध्य कमान सीजे जयचंद्रन ने कलाकारों को सम्मानित किया।

अमृता की प्रेम कथा बीसवीं सदी की अदबी शख्सियात के बीच की सबसे चर्चित कहानी है। साहिर को गुजरे करीब पांच दशक और और अमृता की मृत्यु के दो दशक हो गये, पर इनके जुनून, निःस्वार्थ स्नेह और एकतरफा प्रेम जैसे विषयों को लेकर बहुत से नाटक रचे और मंचित हुए हैं। आज प्रमाणित तथ्यों से प्रेरित और व्यापक शोध पर आधारित मंच पर उतरा वो अफ़साना’ एक महत्वपूर्ण युग की कविताओं, घटनाओं और क्षणों को एक सहज कथा में पिरोती है। साथ ही साहिर के शब्दों-‘ वह अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा…’ को चरितार्थ करता दर्शकों को भावनाओं से द्रवित कर देता है। प्रस्तुति की रचनात्मकता कहानी को सहज लय में आगे बढ़ने देती है। इससे दर्शक उनके जीवन के विभिन्न चरणों से गुजरते हुए एक आकर्षक तारतम्य बनाए रखते हैं। अमृता की पंजाबी कविताओं के संग साहिर लुधियानवी के भावपूर्ण गीत- ‘जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो….’, ‘ठण्डी हवाएं ….’, ‘कभी कभी मेरे दिल में…’, देखिये फिर आपने प्यार से देखा मुझको…’, ”जाने वो कैसे लोग थे…’, ‘अभी न जाओ छोड़कर…’, ‘मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया…’ जैसे गीत नाटक में जान फूंक देते हैं, जो अनकहे भावों और अधूरे प्रेम की टीस को बयां करते हैं।


सुदेश सेठी और जयश्री के संकलित और एडाप्ट किये इस नाटक में स्वयं निर्देशक शमीर साहिर और अमृता के किरदार डा.जयश्री सेठी मंच पर थे। गीतों में श्रिया अरोड़ा और जावेद ने आवाज दी। मंच पार्श्व के कामों में श्वेता मिश्रा के संग स्वाति ने रंगगदीपन में प्रतिभा दर्शायी। अतिथियों का आभार संयोजक जफर नबी ने व्यक्त किया।

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