नखास रोड पर कथित अतिक्रमण के बाद धड़ल्ले से निर्माण! आसपास के कब्जे हटे, फिर इस निर्माण पर क्यों खामोश है नगर निगम? यातायात व्यवस्था प्रभावित होने से पहले कार्रवाई की मांग
लखनऊ नखास रोड पर पाटानाला पुलिस चौकी के सामने सरकारी सड़क की जमीन पर कथित अतिक्रमण कर निर्माण शुरू किए जाने का मामला नगर निगम की अतिक्रमण-विरोधी मुहिम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिस सड़क को आम लोगों के निर्बाध आवागमन के लिए सुरक्षित रहना चाहिए, उसी की जमीन पर कथित रूप से निर्माण की गतिविधियां शुरू होने की बात सामने आई है। सवाल सीधा है—जब इसी इलाके में दूसरे अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं तो सड़क की जमीन पर हो रहे इस कथित कब्जे पर कार्रवाई कब होगी?
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है कि कथित निर्माण किसी दूरदराज अथवा सुनसान स्थान पर नहीं, बल्कि पाटानाला पुलिस चौकी के सामने नखास रोड पर हो रहा है। यदि सार्वजनिक मार्ग की जमीन पर निर्माण बढ़ता गया तो सड़क की उपयोगी चौड़ाई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर यातायात पर पड़ेगा। आज कुछ हिस्से पर कब्जा दिखाई दे रहा है, कल वही सड़क की आवाजाही में स्थायी बाधा बन जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
आसपास अतिक्रमण टूटा, यहां निर्माण कैसे शुरू हुआ?
स्थानीय जानकारी के अनुसार, आसपास किए गए कुछ अतिक्रमण नगर निगम द्वारा हटाए जा चुके हैं। ऐसे में उसी क्षेत्र में सरकारी सड़क की जमीन पर कथित कब्जे के बाद निर्माण शुरू होने की स्थिति नगर निगम की निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करती है।
यदि विभाग को निर्माण की जानकारी नहीं है तो यह सवाल उठता है कि सड़क और सार्वजनिक भूमि की निगरानी कौन कर रहा है। और यदि जानकारी है तो अब तक निर्माण रोकने अथवा भूमि की स्थिति स्पष्ट करने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
जमीन सरकारी है तो निर्माण की अनुमति किस आधार पर?
पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु जमीन की वास्तविक वैधानिक स्थिति है। संबंधित विभाग को राजस्व अभिलेखों और नगर निगम के रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्माणाधीन हिस्सा निजी भूमि है अथवा सार्वजनिक सड़क की भूमि।
यदि जांच में यह सरकारी सड़क की जमीन पाई जाती है और निर्माण के लिए वैध अनुमति नहीं है, तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके विपरीत यदि निर्माण वैध है तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस प्राधिकरण ने किस आधार पर अनुमति प्रदान की है।
आज कब्जा, कल जाम—हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?
सार्वजनिक मार्ग की चौड़ाई में किसी भी प्रकार की कमी यातायात के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। नखास रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर निर्माण के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से जाम की स्थिति बन सकती है। संकरी सड़क और बढ़ता यातायात दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।
ऐसे में प्रशासन के सामने सवाल यह नहीं होना चाहिए कि दुर्घटना के बाद अतिक्रमण कैसे हटाया जाए, बल्कि यह होना चाहिए कि संभावित खतरे को पहले ही क्यों न समाप्त कर दिया जाए।
क्या अतिक्रमण विरोधी अभियान में है कोई अंतर?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि जब नगर निगम आसपास के अतिक्रमण हटाने में सक्रिय रहा है तो कथित रूप से सड़क की जमीन पर निर्माण की स्थिति में समान तत्परता क्यों दिखाई नहीं दे रही। किसी व्यक्ति या अधिकारी पर संरक्षण का आरोप बिना आधिकारिक जांच के लगाना उचित नहीं होगा, लेकिन ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना प्रशासन की जिम्मेदारी अवश्य है।
इसलिए नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को मौके का तत्काल निरीक्षण कराना चाहिए। जमीन की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जानी चाहिए और यदि सरकारी सड़क पर अतिक्रमण प्रमाणित होता है तो बिना किसी भेदभाव के उसे हटाकर मार्ग को पूर्णतः आवागमन योग्य बनाया जाना चाहिए।
सार्वजनिक सड़क किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं हो सकती। अतिक्रमण करने वाला कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून की कसौटी सभी के लिए समान होनी चाहिए।
अब निगाह नगर निगम और प्रशासन पर है—क्या पाटानाला चौकी के सामने नखास रोड की सरकारी सड़क को कथित कब्जे से मुक्त कराया जाएगा, या निर्माण बढ़ने के बाद कार्रवाई का इंतजार किया जाएगा?
