16 1
5 / 100 SEO Score

लखनऊ – शिक्षा का वर्तमान परिदृश्य ऐसा लगता है जैसे हम पीछे घसीटे जा रहे हैं। शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है, जहां शिक्षक और विद्यार्थी हाथ से और दिमाग से काम करके ज्ञानार्जन करते हैं। सबसे घातक है एमसीक्यू प्रणाली जहां मशीन मूल्यांकन कर रही है।
ये विचार ‘हमारी शिक्षा : हम सभी का भविष्य’ विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय की शिक्षाविद् प्रो. अनीता रामपाल ने व्यक्त किये।
आज शाम जन विचार मंच की ओर से विचारक अशोक गर्ग और केके चतुर्वेदी की स्मृति में कैफी आजमी अकादमी सभागार पेपरमिल कालोनी में संगोष्ठी का आयोजन किया गया था।
भोपाल की नीना द्वारा फ़ैज़ की नज्म- हम देखेंगे….. से शुरू हुई संगोष्ठी में प्रो.अनीता रामपाल ने नीट परीक्षा, पेपर लीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कोचिंग उद्योग के बढ़ते दखल की आलोचना करते हुए कहा कि आज बच्चे पढ़ना, लिखना सोचना नहीं कर पा रहे हैं। वस्तुनिष्ठ सवाल बहुत सीमित होने चाहिये। भविष्य के शिक्षक को हमें मशीन नहीं बनने देना है। आज नीट की कमेटी में शिक्षाविद् नहीं, टेक्नालॉजिस्ट आ गये हैं। विद्यार्थियों द्वारा परीक्षाओं के विरोध को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि ‘ह्यूमन प्रोफेशनल्स’ को ‘रिप्लेस’ नहीं किया जा सकता। स्वीडन, नार्वेऔर फिनलैंड के उदाहरण देने के साथ उन्होंने बताया कि आज शिकागो के स्कूल आफ ने एआई को बैन कर दिया है। स्वीडन डिजिटलाइजेशन खत्म करके पाठ्य पुस्तकें वापस लाकर गलती सुधार रहा है। भविष्य की शिक्षा के लिये हमें आलोचनात्मक सोच और दृष्टि विकसित करनी होगी।
अध्यक्षीय वक्तव्य में लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो.रूपरेखा वर्मा ने लम्बे समय से शिक्षा में गड़बड़ियों की चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा आज शीर्षासन की तरह एकदम पलट गयी है। ‌विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस रखने की सख्त आलोचना करते हुए कहा कि शिक्षा से व्यक्ति वैयक्तिक और सामाजिक निर्मिति करने वाला बनता है।
इससे पहले नवाबुद्दीन के संयोजन और प्रतुल जोशी के संचालन में विषय प्रवर्तन करते हुए प्रसिद्ध मानवशास्त्री प्रो. नदीम हसनैन ने कहा कि शिक्षा मानवता को आजाद करने और ताकत देने वाली होनी चाहिए। जहां विद्यार्थी और शिक्षक सह विवेचक हों। उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालय में शिक्षकों के चयन का तरीका बदल गया है और यह चलन प्राथमिक शिक्षा में भी क्रमशः आ रहा है। आज विज्ञान को सीधे पौराणिक संदर्भों से जोड़ा जा रहा है जो तर्कसंगत नहीं है।
प्रो.रामपाल ने अरुण, आएशा, राघव, अंशू, रीता चौधरी आदि श्रोताओं के सवालों के उत्तर भी दिये।
आयोजन में अंशू केडिया, मधु गर्ग, भोपाल की संध्या शैली और नीना के साथ इप्टा के राकेश, नाइन हसन, नागेन्द्र, मृदुला भारद्वाज आदि प्रबुद्ध जन उपस्थित थे। इस अवसर पर अशोक गर्ग की लिखी किताबों के साथ ही अन्य पुस्तकों का स्टाल भी लगा था।

5 / 100 SEO Score

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *