लखनऊ के आशियाना स्थित चेतना डेनटल साहित्यिक केन्द्र मे अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका साहित्य परिक्रमा के नवीन अंक का नये कलेवर के साथ विमोचन हुआ । कार्यक्रम मे अध्यक्ष डॉ० सुशील चंद्र त्रिवेदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्य अतिथि-प्रोफेसर रजनीमान, निदेशक साहित्य परिक्रमा दिल्ली सारस्वत अतिथि प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित, वरिष्ठ साहित्यकार ,विशिष्ट अतिथि डॉ० संजीव अवस्थी, प्रख्यात दंत चिकित्सक एवं साहित्यकार ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से किया।
डाॅ बलजीत श्रीवास्तव महामंत्री अवध प्रांत ने उपस्थित विद्वानो का स्वागत करते हुए साहित्य परिक्रमा पुस्तक के प्रारम्भ करने के इतिहास की नये जानकारी साझा की।
कवि तरल ने वन्दे मातरम गीत की विशेषता बताते हुए कहा की मुख पृष्ठ पर लिखा वन्दे मातरम शब्द नही आनन्द मठ मे लिखा स्वराज का संघर्ष , आजादी का आगाज है। जो कल आज और कल भी महत्त्वपूर्ण रहेगा है।
राष्ट्रीय महामंत्री डाॅ पवनपुत्र बाद ने साहित्य परिक्रमा को लोगो तक कैसे पहुँचाया जा रहा है। यह बताया पत्रिका की संपादक
निदेशक प्रो. रजनी मान, ने बताया की पुस्तक मे कविताओ, कहानियो ,सहित विभिन्न रचानाओ के लिए सथान सुनिश्चित करके प्रथम और अंतिम पृष्ठ को रंगीन के अतिरिक्त साहित्य दृष्टिकोण साधारण ही रखे है। समय से सभी को पत्रिका मिले इसके लिए भारतीय डाक विभाग की दो सेवाओ को लिया जा रहा है ।
प्रदेश प्रचार प्रमुख अविनाश चंद्र मिश्र के मंच संचालन मे प्रो डाॅ नीतू शर्मा ने संपादकीय की बात करते हुए कहा की जो संरचनात्मक भाषा होती है वह साहित्य की कसौटी होती है।
प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने भारतीय संविधान की चौबीस बोलियो सहित दो अन्य बोलिए की मान्यता के साथ अन्य उपबोलियो को भी पत्रिका मे शामिल किये जाने की बात को कहा।, डॉ. संजीव अवस्थी, कहते की साहित्य परिषद की यह पत्रिका समाज और युवाओ के जरूर पढा जाना चाहिए क्योकि इसका साहित्य शोध और समर्पण के साथ लिखा जाता है।
अवध प्रांत अध्यक्ष विजय त्रिपाठी ने कहा की डाक व्यवस्था मे संविदा करमचारियो की लचर प्रणाली के कारण पत्रिका समय से नही मिलती जिसमे सुधार की जरूरत है। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चन्द्र त्रिवेदी ने बताया कि साहित्य परिषद की पत्रिका मे साहित्यकारो ने अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है यह केवल पत्रिका नही वरन भारतीय साहित्य का दर्पण है। लखनऊ महानगर अध्यक्ष निर्भय गुप्ता ने धन्यवाद आभार व्यक्त किया ।
