गोमतीनगर जनकल्याण महासमिति वार्षिकोत्सव एवं लखनऊ शहर की जनकल्याणकारी उद्घाटन कार्यक्रम में भारत सरकार रक्षामंत्री लखनऊ शहर के लोकप्रिय सांसद राजनाथ सिंह, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, राज्यसभा सांसद संजय सेठ, महानगर अध्यक्ष आनन्द द्विवेदी, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक ओ पी श्रीवास्तव, डॉ नीरज बोरा, योगेश शुक्ला, एमएलसी रामचंद्र प्रधान, ई अविनाशी कुमार सिंह, मुकेश शर्मा, पवन सिंह चौहान ने बटन दबाकर कर लखनऊ शहर में 5827.9 लाख की विभिन्न योजनाओं का बटन दबाकर लक्ष्मण मण्डपम् गोमतीनगर (कम्युनिटी सेन्टर एवं डे केयर सेन्टर), लक्ष्मण मण्डपम् गणेशगंज (कम्युनिटी सेन्टर एवं डे केयर सेन्टर), सामुदायिक केन्द्र सुदर्शनपुरी ऐशबाग, देव वन-नक्षत्र वाटिका एवं ई-लाइब्रेरी विनीत खण्ड गोमतीनगर, लखनऊ संस्कृति एवं कला संग्रहालय (म्युज़ियम) हुसैनाबाद चौक शुभारंभ किया।
रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का दिन लखनऊ के इतिहास के पन्नों में मैं कह सकता हूँ एक नई इबादत लिखने जा रहा है। आज यहाँ पर सिर्फ कुछ बिल्डिंग या कुछ प्रोडक्ट का उद्घाटन करने के लिए नहीं आये हैं। हम यहाँ लखनऊ के विकास के संकल्प को पूरा करने का जो मेरा सपना है, उसे पूरा करने की दिशा में कुछ कदम और आगे बढ़ाने वाली योजनाओं के उद्घाटन के निमित यहाँ पर आये है।
हम अक्सर देखते है कि शहरों के विकास को केवल बड़ी और चौड़ी सड़कों, मेट्रो व चमचमाती बिल्डिंग से जोड़ कर समझा जाता है। और ये सही भी है कि सारी चीजें डेवलपमेंट का पैरामीटर होती है, लेकिन मैं आप सब से यह भी कहना चाहता हूँ कि असली विकास व होता है जो समाज के आखिरी छोर पर खड़े इंसान को, हमारी माताओं बहनों को, हमारे बुजुर्गों को और हमारे युवाओं जिनके घर के पास ही एक बेहतर जिंदगी का एहसास करा दे। विकास व होता है जो विरासत को भी साथ में रखे, आपके सपने को भी साथ में रखे और आपके अपनों को भी अपने साथ रखे।
और आज हम जिन प्रोजेक्ट की शुरुआत कर रहे हैं। यह हमारी इसी सोच का नतीजा है।
मैं देश का रक्षा मंत्री होने के साथ साथ आप सब ने मुझे लखनऊ का सांसद भी चुना है। इस नाते मैं जितना आपकी तकलीफें समझता हूँ, उतना ही लखनऊ की जनता की दिक्कतों को भी मैं स्वयं महसूस करता हूँ।
यहाँ गोमती नगर और गणेशगंज जैसे इलाकों की एक बड़ी समस्या यह रही है। यहाँ लोगों को अपने परिवार के शुभ कार्यक्रमों जैसे शादी, ब्याह, मुंडन, जनेऊ या जन्मदिन की पार्टियों के लिए अच्छी जगह नहीं मिलती थी। या तो जगह बहुत महंगी होती थी, या तो बहुत दूर होती थी। इसके साथ ही जो कामकाजी माताएं हैं उनके लिए यह चिंता का विषय रहता था कि वो अपने बच्चों को किसके पास सुरक्षित छोड़ कर जाए। इसी जरूरत को समझते हुए हमने लक्षमण मंडक मंडपम की अवधारणा को जमीन पर उतारा है।
अब गणेशगंज और गोमती नगर के निवासियों को अपने कार्यक्रमों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और न ही भारी किराये का बोझ उठाना पड़ेगा। साथ ही यह बना डे केयर सेंटर हमारी माताओं, बहनों और बेटियों को यह विश्वास देगा कि जब वे काम पर जा रहे हैं तो उनके बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हाथों में है।यह सुविधा गाँव देहात से लेकर शहर तक हर परिवार के लिए मैं समझता हूँ किसी वरदान से कम नहीं है।
गोमतीनगर के विनीत खंड में देवबन और नक्षत्र वाज का खुल रही है। अक्सर शहरों में देखा जाता है कि खुले स्थानों यानि पार्कों की कमी रहती है और जो जगह होती भी है वहाँ कई बार गंदगी या अतिक्रमण हो जाता है। लेकिन एक समय पर जिस जमीन पर भी कूड़े के ढेर लगते थे और यहाँ अराजक तत्वों का जमावड़ा रहता था, आज उसी जगह को एक अद्भुत रूप दे दिया गया है। साथियों इस देवबंद में वास्तु शास्त्र के अनुसार विभिन्न प्रकार की वाटिकाएं बनाई गयी है। यहाँ आपको कई औषधीय पौधे भी देखने को मिलेंगे। इसका मतलब यह है की अब गोमती नगर और आस पास के लोगो को सुबह शाम टहलने, योग करने और अपने बच्चों की प्रकृति के करीब ले जाने के लिए एक बेहतरीन और स्वच्छ जगह मिल गई है। यह जगह सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि स्वास्थ्य और अध्यात्म के लिए भी है और बहुत ही लाभकारी है। जो लोग पेड़ पौधों और जड़ी बूटियों के बारे में जानने के इच्छुक हैं उनके लिए यह वाटिका किसी पाठशाला से कम नहीं है। यदि कुछ कमी रहेगी तो उस कमी को भी मैं दूर करने की कोशिश करूंगा। और हम चाहते हैं की हमारे बच्चे मोबाइल फ़ोन की दुनिया से निकाल कर ले जाए । ऐसी हरियाली को भी देखे।इनमें खेले और वह स्वस्थ रहे।
इसी परिसर में बनी ई लाइब्रेरी भी आज के डिजिटल युग की यह बहुत सबसे बड़ी मांग है। गाँव हो या शहर, आज हर बच्चा और नौजवान पढ़ना चाहता है, आगे बढ़ना चाहता है। लेकिन महंगी, किताबें, खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं होती। यह ई लाइबरेरीवै से छात्रों के लिए, अथवा विद्यार्थियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। अब किताबों के लिए इधर उधर भटकने की जरुरत नहीं है। एक क्लिक पर दुनिया भर का ज्ञान आपके सामने होगा।
आप यूनियन पब्लिक कमीशन, सिविल सेवा, बैंकिंग, रेलवे या फिर किसी भी कॉम्पिटेटिव एक्जाम की तैयारी कर रहे हों, यहाँ बैठकर आप मुफ्त में पढ़ाई कर सकेंगे। यह लाइब्रेरी हमारे बच्चों के सपनों को उड़ान देने का काम करेगी, ऐसा मेरा पक्का विश्वास है।
साथियों, लखनऊ की पहचान, उसकी तरजी, गंगा, जमुनी, संस्कृति और अद्भुत कारीगरी, यही रही है हमारे लखनऊ की पहचान। लेकिन अभी दुनिया जिस गति से आगे बढ़ रही है, उस आध्यमिकता की अंधी दौड़ में कहीं न कहीं हम अपनी विरासत को भूलते जा रहे हैं। ऐसे में लखनऊ के हुसैनाबाद चौक पर बना यह लखनऊ संस्कृति और कला संग्रह है।
हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का एक छोटा सा हम सभी का प्रयास है। इस संग्रहालय के माध्यम से आप अवध के गौरवशाली इतिहास, यहाँ की अनूठी कारीगरी और यहाँ की मिली जुली संस्कृति से भी रुबरु हो सकेंगे। यहाँ युवा पीढ़ी मनोरंजन के साथ साथ इतिहास के पन्नों को भी महसूस कर सकेगी। और यह संग्रहालय एक तरफ लखनऊ के गौरव को तो बढ़ाएगा ही, साथ ही यहाँ पर्यटकों की भीड़ बढ़ने से आटो रिक्शा, चालक, दुकानदार और छोटे कारीगर सबको रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। ये हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का मैं मानता हूँ ये एक ऐतिहासिक कदम है। इसके लिए मैं लखनऊ की जनता को हार्दिक बधाई देता हूँ।
हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में और यहाँ के लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए जो किया है, उसे आप सब देख रहे हैं। मुझे लगता है यहाँ पर किसी को यह बतलाने की आवश्यकता नहीं होगी कि पहले उत्तर प्रदेश की क्या स्थिति थी और अब उत्तर प्रदेश की क्या स्थिति हो गयी। और एक समय था की उत्तर प्रदेश माफियाओं का गढ़ था, आज उत्तर प्रदेश में संतों और सन्यासियों का गढ़ हो गया है। एक समय था की उत्तर प्रदेश को बीमारू प्रदेश कहा कहा जाता था। आज उत्तर प्रदेश को बाहर भी चले जाइए। अब लोग कहते हैं की अब काफी हद तक उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बन गया है। और ये तमाम परिवर्तन जो उत्तर प्रदेश के हुए हैं, वह सिर्फ और सिर्फ उत्तर प्रदेश की जनता के आशीर्वाद तथा डबल इंजन की हमारी सरकार के प्रयासों से हो रहे हैं, ऐसा मैं मानता हूँ।
इसके अतिरिक्त भी अनेक प्रोजेक्ट लखनऊ के विकास के लिए हम लोगों ने शुरू किए हैं। यह मेरा सौभाग्य है की मुझे कुछ दिनों के अंतराल पर लगातार लखनऊ। आकर यहाँ के कुछ प्रोजेक्ट और स्कीम के उद्घाटन का अवसर अवसर मिलता है। और कभी यहाँ के अधिकारियों से बैठकर भी यहाँ के योजनाओं के बारे में विस्तरित चर्चा भी में करता हूँ। मेरा पूरा प्रयास रहता है लखनऊ की मेरी जनता को बेस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर मिल सके। जितना भी अच्छा से अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर मिल सकता है, वो मिल सके साथियों, जिस तरह “एक पेड़ को बढ़ने के लिए मज़बूत जड़ों की जरुरत होती है, ठीक उसी तरह किसी भी शहर की तरक्की के लिए उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर का मजबूत होना भीu उतना ही जरूरी है।” सड़के हों, परिवहन हो, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का मजबूत होना यह बहुत ही आवश्यक है।
इसलिए हमने फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया और हमने लखनऊ में सड़कों का जाल जहाँ तक बिछाया जा सकता था, ब्रिजेज का जाल बिछाया जा सकता था। बिछाने की हम लोगों ने कोशिश की है लेकिन फिर भी मैं संतुष्ट नहीं हूँ। अभी बहुत सारे काम पड़े हुए हैं, जिन कामों को हमको करना है, मैं कोशिश करूँगा जितनी जल्दी से जल्दी हो सके, जहाँ काम की आवश्यकता है वह काम प्रारंभ हो।तो जल्दी से जल्दी वह पूरे हो सके। आप सब को याद होगा की समय था पहले लखनऊ से बाहर निकलते ही सड़कें, सकरी और जाम से भारी मिलती थी।आज स्थिति काफी हद तक बदल चुकी है।
लखनऊ से निकलने वाले 4 राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण और उच्चीकरण भी किया गया है। चाहे आपको सुल्तानपुर होते हुए गाजीपुर जाना हो या फिर हरदोई शाहजहांपुर की तरफ जाना हो। अब रास्ते एकदम चौड़े मिलेंगे और रास्ते आपको सुरक्षित मिलेंगे।लखनऊ से अयोध्या और लखनऊ से कानपुर जाने वाली सड़कें भी पूरी तरह से बदली हुई है।
यहाँ तक लखनऊ और कानपुर की सड़क का प्रश्न है। मैं समझता हूँ कुछ ही दिनों में इस सड़क का भी हम लोग उद्घाटन कर देंगे और यातायात से प्रारंभ हो जाएंगे। न केवल लखनऊ बल्कि इसके आस पास के इलाके भी अब तेजी से प्रगति कर रहे हैं।
लखनऊ की प्रगति के लिए आवश्यक था के आस पास के इलाकों की भी प्रगति होनी चाहिए। आस पास के क्षेत्रों में जो बुनियादी ढांचों का विकास जिस हद तक किया जा सकता है वह भी होना आवश्यक है। नहीं तो हम लखनऊ को एक जो डेवलप सिटी बनाना चाहते हैं वह डवलप सिटी लखनऊ नहीं बन सकती जब तक की आस पास का भी विकास न हो। लखनऊ का विकास करते समय इन सब सारी चीजों का भी ध्यान हम लोगों ने रखा है।
एक बड़ी खुशखबरी यह भी है कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 927 का निर्माण होने वाला है जो आउटर रिंग रोड के पास से बाराबंकी से शुरू होकर बहराइच तक जाएगा और यह 111 किलोमीटर लंबा फोर लेन का मार्ग होगा और इसके साथ ही फोर लेन की सर्विस रोड भी बनेगी और इस प्रोजेक्ट पर करीब 7000करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा की अभी बाराबंकी, बहराइच जाने में जो ढाई घंटे लगते है वह समय घटकर मात्र सवा घंटे रह जाएगा।
इस सड़क के आस पास स्टेट कैपिटल रीजन राज्य राजधानी क्षेत्र के विकास का एक नया कॉरिडोर भी बनेगा। यानी अब इस सड़क के किनारे व्यापार भी बढ़ेगा और लोगों को कुछ न कुछ रोजगार भी मिलेगा। इसके अलावा लखनऊ शहर के अन्दर हमने 25 फ्लाई ओवर का निर्माण कराया है।
पहले पॉलिटेक्निक चौराहे पर, इंजीरिंग कॉलेज के सामने या फिर रेलवे क्रासिंग पर आधे आधे घंटे तक गाड़ियां फंसी रहती थी। लेकिन फ्लाईओवर बना कर हम लोगों ने वो समय और धन दोनो बचाया है। और साथियों यह आउटर रिंग के आउटर रिंग रोड के चारों के 6 लेन की सड़कें और 3 एक्सप्रेस वे यह जुड़ जाएंगे तो लखनऊ 405 किलोमीटर के दायरे के लिए सबसे बड़ा सप्लाई सेंटर बन जाएगा। मतलब यह है कि गाँव सेयू लेकर शहर तक हर जरूरत का सामान लखनऊ से आसानी से और जल्दी पहुंचाया जा सकेगा। इससे व्यापार में भी तेजी आएगी और हमारे नौजवानों के लिए हजारों नई नौकरियां भी पैदा होंगी
यदि मैं रेलवे की बात करूँ तो आपने देखा होगा की गोमती नगर में विश्व स्तरीय रेलवे टर्मिनल बनकर तैयार हो गया है और वहाँ पर गाड़िया भी चलने लगी है। और मैं कहना चाहता हूँ आपकी जानकारी के लिए की एशिया का बिगेस्ट। एशिया का सबसे बड़ा यह रेलवे स्टेशन गोमती नगर बना है। अब यहहै दुनिया का है या नहीं अब इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। लेकिन एशिया के बारे में बता सकता हूँ। सबसे बड़ा है यहां। देश के कोने कोने में जाने वाली गाड़ियां या तो गुजर रही है, नहीं गुजर रहे हैं तो आगे गुजरेंगे। साथ ही चारबाग स्टेशन पर सेकेंड एंट्री बन चुकी है।
आलम नगर, उत्तरटिया, ट्रांसपोर्ट नगर और मानक नगर को सेटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित किया गया है। उसका भी इसमें बहुत सारी चीजों का भी मैं लोकार्पण कर चूका हूँ। एशबाग, डालीगंज और बादशाह नगर स्टेशनों का भी कायाकल्प हुआ है। इन सबका एक ही मकसद था कि शहर के अन्दर भीड़ भाड़ वाली जगहों पर ट्रैफिक का दबाव कम हो। साथियों सड़क और रेलवे मार के अलावा हम लोगों ने हवाई अड्डों पर भी जोर दिया है। लखनऊ के लोग तो वैसे भी हवाई जहाज का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। मैं सिविल आवेशन मिनिस्ट्री की एक रिपोर्ट देख रहा था कि यहाँ पूरे देश में हवाई यात्रियों की संख्या सालाना 13 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है।
वहीं लखनऊ एयरपोर्ट पर यहाँ आंकड़ा 24 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
और इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए हमने एयरपोर्ट के विस्तार पर बल दिया। 24 करोड़ रूपए की लागत से नए टर्मिनल थ्री का निर्माण किया गया है लेकिन अब इसकी क्षमता बढ़ कर करोड़ से भी अधिक की हो गई है। साथियों जी, मैं रक्षा मंत्री होने के नाते की बात करूँ।
मुझे यह देखकर बेहद खुशी होती है की हमारा लखनऊ डिफेंस सेक्टर में भी अब आगे बढ़ चढ़ कर योगदान देने के लिए उत्सुक है।यह लखनऊ के लिए बड़े गौरव की बात है। इसे आगरा और कानपुर के साथ डिफेंस नोट घोषित किया गया है। यह डिफेंस नोट घोषित किया गया। लखनऊ को अब लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण शुरू हो गया है। और गर्व की बात यह है कि उसकी पहली खेप हमारी सेना को भी सौंप दी गई है। और भी कई स्थानों पर जाता है, उसकी चर्चा में सार्वजनिक रूप से नहीं कर सकता हूँ। इसके साथ ही रक्षा उपकरणों से जुड़े कई और छोटे बड़े कारखाने भी यहाँ स्थापित होने वाले हैं।
मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को कहा है कुछ और जमीन चाहिए हमको लखनऊ के आस पास। और मुझे प्रसन्नता है कि योगी जी ने तुरंत अपनी सहमत दी है और मैं कहना चाहूँगा यहाँ के मुख्य मंत्री जी के बारे में जो कुछ भी कहा है, जिस भी प्रकार के सहयोग की आवश्यकता है, चट पट यहाँ के, हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने उसको पूरा किया है। क्षण भर की देर नहीं हुई है ।
और अभी अशोक लेलैंड कंपनी नहीं लखनऊ में हैवी इलेक्ट्रिक वेहिकल बनाने की फैक्ट्री शुरू कर दी है और इस फैक्ट्री में सालाना आपको, जानकर, खुशी, होगी, पचीस, हजार वाहन बनाने की क्षमता है।सालाना इस फैक्ट्री में।
यह सब होने से हमारे यहाँ के नौजवानों को अब नई टेक्नोलॉजी, सीखने और अच्छी तनखाह वाली नौकरी पाने का भी मौका मिलेगा। उन्हें काम के लिए दूसरे शहरों में न जाए। लखनऊ का विकास बेहद सुनियोजित योजना के तहत चल रहा है।और विकास की गाथा यहीं नहीं रुकने वाली। यह तो बस एक शुरुआत है और इसमें भी कोई सहयोग कर रहा है। पूरा कंसेप्ट जो दे रहा है लखनऊ के डेवलपमेंट का वो हमारे त्रिमान दिवाकर जी, त्रिपाठी व कांसेप्ट देने का काम कर रहे हैं।
इस बस एक शुरुआत है। यहाँ हर रोज कुछ न कुछ नया बन रहा है और हर रोज कुछ न कुछ नया हाँ समर भी रहा है।
यह विकास की गंगा है। जिसकी धारा में गरीब का, व्यापारी का, बुजुर्ग का और नौजवान का,यू सबका कल्याण इसी में समाया हुआ है। हमारा निरंतर प्रयास रहेगा कि लखनऊ वासियों का रहन सहन सुख सुविधाओं से संपन्न हो और वह परिपूर्ण रहे। वैश्विक जियो पोलिटिकल, सिचुएशन के बावजूद मानो भाइयों। आज जिस भारत के हम नागरिक कह सकते हैं, आज भी वैश्विक संकट समय कितना बड़ा है। वेस्ट एशिया क्राइसिस के कारण आप सबको मालूम है। लेकिन सारी परिस्थितियों में आज भी दुनिया में सर्वाधिक तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था यानी एकोनोमी यदि किसी देश की है तो हमारे और आपके देश भारत की है। ये हम सब के लिए गौरव का विषय है। विषय यहाँ पर हमारा भारत कुछ वर्षों बहुत कमजोर 5 देशों में माना जाता है, आज दुनिया के टॉप इकॉनमीज में शामिल हो गया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम हमारी संसद और विधानसभाओं में आपको भी 33 फीसदी का आरक्षण मिलेगा 33 फीसदी का। सेनाओं में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है की मैं चर्चा कर रहा हूँ।
राम मंदिर निर्माण काशी विश्वनाथ, कॉरिडोर का निर्माण, उज्जैन के महाकाल मंदिर, नए कॉरिडोर का निर्माण, ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं जो आगे आने वाली पीढ़ियाँ तक याद रखेंगी विकास के साथ साथ विरासत में आगे बढ़नी चाहिए।यह हमारी सरकार की सोच है और मैं मानता हूँ कि यह कोई छोटी बात नहीं है। इस देश की जनता ने हम लोगों पर जो विश्वास दिखाया है, हम उसको सही साबित करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
इस समय जो वेस्ट एशिया की क्राइसिस चल रही है उसके बारे में भी कुछ बातें आपके सामने रखूंगा।
आप जानते हैं।
जून 2026 में प्रधान मंत्री मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे हो रहे हैं।इन 12 वर्षों कई तरह की चुनौतियाँ आई है। मगर हमारी सरकार हर चुनौती पर विजय प्राप्त करने में पूरी तरह से कामयाब रही है। हमने विपरीत परिस्थितियों में भी स्थिति पर नियंत्रण बनाये रखा और हम पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर उभरे हैं।
इस समय पश्चिम एशिया में जो संकट चल रहा है उसके कारण कई चुनौतियां पैदा हुई है। हालांकि औपचारिक रूप से सीज फायर की बात सामने आई है।
मगर जो जमीन पर हालात है उसे देखते हुए यह मान लेना कि संकट पूरी तरह से समाप्त हो गया है।मैं समझता हूँ की उचित नहीं होगा। पश्चिम एशिया में जब तनाव बढ़ा तो हमारे प्रधानमंत्री जी ने मेरी ही अध्यक्षता एक कमेटी का भी गठन किया जिसका काम है कि पश्चिम एशिया में जो संकट है उसके दुश परिणामों से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों में मजबूती लाना। स्वयं हमारे प्रधान मंत्री जी इस स्थित की समीक्षा करते रहते हैं और आवश्यक निर्देश देते रहते है। और मुझे इस बात का संतोष है की शुरू में देश में जिस तरह का माहौल बनाने की कोशिश की गयी वैसा कहीं कुछ नहीं है। मैं आप लोगों के सामने भी यह बात कहना चाहता हूँ की देश में किसी भी संकट से निपटने के लिए पर्याप्त भंडार है। हम लोगो के पास पेट्रोल, डीजल, कुकिंग, गैस यानि रसोई गैस सब की उपलब्धता है और पर्याप्त भंडार भी हमारे यहाँ मौजूद है। इस बात को मैं फिर से मैं दोहराना चाहता हूँ और सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि 2, 3 महीने बाद भी किसी तरह का संकट पैदा न हो।
आप जानते है की जिस प्रकार से युद्ध, समय, इजराइल, अमेरिका और सारा, ये हमारे जोयू गल्फ के कंट्रीज है, ये सब जो कुछ भी चल रहा है, इसका परिणाम, इससे इससे कोई दुनिया का कोई देश छूटा नहीं है, अमेरिका भी अछूता नहीं है, अमेरिका में भी गंभीर संकट पैदा हो रहे है।लेकिन सारी चुनौतियों के बावजूद भारत ने उन चुनौतियों को स्वीकार किया है और उन चुनौतियों पर विजय हासिल करने में भी काफी हद तक हमने कामयाबी हासिल हो सकता है। थोड़े समय के लिए कुछ कभी थोड़ी, बहुत किसी चीज की कमी हो जाए, इस सच्चाई को भी नकार नहीं सकता।
लेकिन मैं समझता हूँ की यह वैश्विक संकट है, ग्लोबल क्राइसिस समय है।
देश की जनता को उस समय, पूरी ताकत के साथ, संयम के साथ, साहस के साथ, खड़े रहने की आवश्यकता है।
इसलिए मैं आप सभी से निवेदन करना चाहता हूँ। किसी भी प्रकार की अफवाह पर आप ध्यान न दें। और मैं स्वयं करता हूँ कोई बड़ा संकट हमारी सरकार के रहते हुए इस देश में पैदा नहीं होने पायेगा। और मैं याद दिलाना चाहता हूँ हमारे देश में जब कोविड जैसा महासंकट का महासंकट पैदा हुआ था, उसकाu हम लोगों ने सामना कर लिया। तो जो भी पश्चिम एशिया में चल रहा है, उसका सामना करने के लिए हम पूरी तरह से तैयार है।
विश्व बैंक ने कहा है कि भारत किसी भी ऊर्जा संकट से निपटने में सक्षम है।
यह मेरा ऑब्जर्वेशन नहीं है। वर्ल्ड बैंक का जर्वेशन किसी देश का यह दशक आरम्भ से दुनिया के लिए अनेक चुनौतियां लेकर आया है।
चाहे चिप्स हो, रेयरर्थमिरलहो एनर्जी हो या कॉनफ्लिक्ट की वजह से बहुत सारी चीजें प्रभावित हुई है और ये मानव उठा के तेज विकास से जुड़ी चीजें हैं।
इनकी सप्लाई चेन में, इनके फ्लो में ब्रेक लगने से पूरी मानवता का विकास स्वाभाविक रूप से प्रभावित होता है।
इसे भारत जैसे लोकतांत्रिक देश का इस दिशा में आगे बढ़ना। पूरे विश्व के विकास के लिए मैं समझता हूँ की बहुत ही अहम है और बहुत ही आवश्यक है। साथियों, हमारी सरकार ने कोरोना की आपदा के समय पर ही तय कर लिया था की भारत सेमी कंडक्टर सेक्टर का नया ग्लोबल हब बनेगा और इस सेक्टर में भारत आत्म निर्भर बनेगा और सेमी कंडक्टर में आत्म निर्भरता सिर्फ। एक चीप तक यह सीमित नहीं है। इसका मतलब है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में, इलेक्ट्रिक, वाइकल्स में, क्लीन, एनर्जी में, डिफेंस में, इलेक्ट्रॉनिक्स में ऐसे अनेक सेक्टर जिसमे कि हमारी हमें आत्म निर्भरता को बल मिलेगा।
पिछले। साल 2021 में भारत ने इंडिया सेमी कंडक्टर मिशन भी प्रारंभ कर दिया है। संकट के बावजूद विकास की गति में कोई कमी नहीं आई है और अभी उत्तर प्रदेश के नोएडा में नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भी उद्घाटन हुआ है। आपने देखा होगा एशिया का बिगस्ट एयरपोर्ट और किसी भी देश में एयरपोर्ट सिर्फ एक सामान्य सुविधा नहीं होती। एअरपोर्ट प्रगति को भी उड़ान देते हैं।
योगी जी को लंबे समय से जो पेंडिंग पड़ा हुआ था, केवल सोच के अवसर पर था।
10, 12 वर्षों के अन्दर आज उत्तर प्रदेश में हवाई अड्डों के नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। उनकी संख्या एअरपोर्ट की बढ़कर 17 कर दी है । और तो उत्तर प्रदेश भारत का अकेला प्रदेश है। यहाँ सर्वाधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, भारत का अकेला स्टेट है। यहाँ सर्वाधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। आपका लखनऊ का एअरपोर्ट भी उन्हीं में से एक है। उसका विस्तार अब आप सब के सामने है। उसकी कैपेसिटी हमारे लखनऊ एयरपोर्ट की और अधिक बढ़ाई जा रही है। विकसित भारत के विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारी सरकार गजब का निवेश कर रही है। अभी के लगभग 12 वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर का बजट आपको जान कर आश्चर्य होगा, आज तक नहीं हुआ है। इतने कम समय में कोई यह करिश्मा कर दे। 12 वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर का बढ़त 6 गुना से अधिक बढ़ाया गया है, 6 गुना से और इन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपए, 17 लाख करोड़ रुपए हाइवे और एक्सप्रेस वे पर खर्च किए गए हैं। और 1 लाख किलोमीटर से अधिक की हाइवे का निर्माण किया गया है। 2014 तक रेलवे में सिर्फ 20 हजार किलोमीटर रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ था, जबकि ट्वेंटी फोर्टीन के बाद से 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा रेलवे ट्रैक का इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया है।
यह काम सरकार के काम करने की गति है। आज ब्रॉड गेज नेटवर्क का भी लगभग सत प्रतिशत इलेक्ट्रिशिकेशन हो गया है। अगले सप्ताह एक और बड़ा ऐतिहासिक काम होने जा रहा है।
जिसकी मैंने चर्चा की संसद का सत्र 16, 17, 18 को है, वहाँ पर विधायिका में महिलाओं का प्रतिशत बढ़े इस सम्बन्ध में बिल आएगा और आपको मालूम है।
2023 में ही नारी शक्ति बंधन अधिनियम पारित हो हो चुका है। अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ कि यह जो आपका सपना है, वह साकार हो। इस दृष्टि से जो कुछ भी किया जा सकता है, इस देश के लिए, इस प्रदेश के लिए, हमारी सरकारें कर रही हैं।
गोमतीनगर जनकल्याण महासमिति अध्यक्ष डॉ बी एन सिंह, महासचिव डॉ राघवेन्द्र शुक्ल, उपाध्यक्ष राकेश त्यागी, डॉ पशुपति पांडेय सचिव कर्नल ए एन पाण्डेय, गोपाल कृष्ण नायर, के के मौर्य, संजय निगम, लखनऊ महानगर महामंत्री घनश्याम दास अग्रवाल, सतेंद्र सिंह, टिंकू सोनकर, उपाध्यक्ष सौरभ वाल्मीकि, विनायक पाण्डेय, सीता नेगी, अपूर्व भार्गव, शैलेन्द्र राय, मीडिया प्रभारी अनुराग साहू सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता, क्षेत्रवासी उपस्थित रहें।

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